
नालंदा:- सदर अस्पताल में शुक्रवार को विश्व हृदय दिवस के मौके मरीज को जांच करते स्वास्थ्य कर्मी विश्व हृदय दिवस और विश्व बुजुर्ग दिवस के अवसर पर शुक्रवार को बिहारशरीफ सदर अस्पताल में मधुमेह, रक्तचाप सहित गैर संचारी रोग की भी जांच शिविर का आयोजन किया गया गया | शिविर में करीब 200 मरीजों की जांच की गयी। जिला गैर संचारी पदाधिकारी डॉक्टर राम मोहन सहाय ने बताया कि विश्व ह्रदय दिवस और 1 अक्टूबर को विश्व बुजुर्ग दिवस के मौके पर 14 अक्टूबर तक निशुल्क स्वास्थ्य जांच पखवाड़ा का भी आयोजन किया जाएगा इसके अंतर्गत सभी व्यक्तियों की गैर संचारी रोगों की जांच व नाक, कान, गला, आंख, गठिया तथा बुजुर्ग लोग में पाए जाने वाले अन्य बीमारियों के बारे में में भी परामर्श दिया जाएगा। कार्यक्रम की सफलता हेतु पहले से ही बैनर होर्डिंग के माध्यम से जागरूकता किया जा रहा है। सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को प्रसार सामग्री उपलब्ध करा दी गई है | विश्व हृदय दिवस के मौके पर भी जांच शिविर में बीपी , शुगर और ईसीजी की जांच कर बचाव के उपाय बताए गए | शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग ह्रदय है। इसलिए इसकी सेहत का पूरा ख्याल रखें। क्योंकि, बदलती जीवन शैली न सिर्फ बुजुर्गों को युवाओं को भी ह्रदय रोगी बना रही है। इसका मुख्य कारण जंक व पैक्ड फूड हैं। बचपन से ही इसकी लत बढ़ रही है। जो आगे चलकर रक्तचाप व मधुमेह का कारण बनता है। इस कारण ह्रदय में भी समस्याएं बढ़ रही हैं। यही कारण है कि ह्रदयाघात पीड़ितों में 15 फीसद रोगी 25 से 40 साल के उम्र वाले मिल रहे हैं। एक सामान्य वयस्क व्यक्ति की ह्रदय गति 60 से 100 प्रति मिनट (धड़कन) होनी चाहिए। इससे कम या अधिक धड़कन होना ह्रदय रोग की ओर इंगित करता है। ऐसे में हमें संयमित जीवनशैली जीनी चाहिए। मेडिकल साइंस ने बेशक बहुत विकास किया है। लेकिन, आज भी बचाव ही सबसे बेहतर उपाय है। यानि बीमारी को दावत ही न दें। जिला में ह्रदय रोग के कितने रोगी हैं। इसका कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं है। लेकिन, डॉक्टरों की मानें तो इसके दो हजार से अधिक रोगी हो सकते हैं। हालांकि, हाल के दिनों में बिहारशरीफ शहर में दो निजी अस्पतालों में इसके ऑपरेशन को छोड़कर जांच व इलाज की व्यवस्था हुई है। बावजूद, ऑपरेशन के लिए आज भी लोगों पटना या दिल्ली जाना पड़ता है। बिहारशरीफ कार्डियोलोजिस्ट डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि विश्व ह्रदय दिवस मनाने से नहीं बल्कि इस रोग के प्रति लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। तभी हम लोगों को इस घातक बीमारी से बचा सकते हैं। आज भी लोगों को इस बीमारी की सही जानकारी नहीं है। ह्रदय रोग होने पर ही डॉक्टरों द्वारा उन्हें पता चलता है। जबकि, हम कुछ सावधानियां बरतकर ह्रदय को स्वस्थ रख सकते हैं। सामान्य तौर पर इसके लक्षण दिखने पर भी 50 साल के बाद खासकर ह्रदय रोग वाले रोगियों को नियमित जांच कराते रहना चाहिए। फिजिसियन डॉ. मिथिलेश प्रसाद ने बताया कि एक रपट के अनुसार भारत में दिल के दौरे या ह्रदय से संबंधित अन्य बीमारियों का सामना करने वाले लगभग 15 फीसद लोगों की उम्र 40 साल से कम है। इनकी उम्र सामान्य तौर पर 25 से 40 साल के बीच होती है। इससे बचने का तीन सबसे कारगर उपाय है। आहार पर नियंत्रण, नियमित व्यायाम व धूम्रपान और तंबाकू की आदत नहीं रखना। एमडी पीएसएम (प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसीन-निवारण एवं सामाजिक आयुर्विज्ञान) डॉ. निर्मल ज्योति ज्योत्सना ने बताया कि बदलते परिवेश में युवाओं के साथ ही बच्चों में भी अवसाद व तनाव के मामले बढ़ रहे हैं। अच्छे अंक लाने का दबाव, अधिक देर तक काम करने का दबाव, दफ्तरों में कुर्सी पर बैठकर लगातार एक ही पोज में काम करने की परेशानी, नियमित योग न करना, बाहर का खाना, धूम्रपान की आदत युवाओं में तनाव पैदा करती है। इसका असर नींद पर पड़ता है। इसका असर धीरे-धीरे ह्रदय पर पड़ने लगता है। उन्होंने बताया कि हमें सामान्य जीवन जीने की आदत डालनी होगी। इसके लिए सबसे पहले तनाव को खत्म करना होगा। इसकी सबसे पहली शर्त पर्याप्त व अच्छी नींद है। मौजूदा समय में मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक गजटों पर अधिक समय बिताना भी हमारे तनाव का कारण बनती है। शक्कर, नमक और तेल का सीमित मात्रा में सेवन। घंटों एक ही स्थिति में न बैठें। सप्ताह में एक दिन अनाज का सेवन न करने से लाभ मिलेगा। रोजाना व्यायाम या योग करें। रोजाना कम से कम छह से सात घंटे यानि पर्याप्त नींद लें। छाती में दर्द, श्वास, खांसी, आंखों के सामने अंधेरा छाना, शरीर का रंग अचानक से बदल जाना, जी मिचलाना, घबराहट, बेचैनी, पसीना आना, रक्तचाप का बढ़ना, चेहरे पर कालिमा व अन्य।