केएसटी कॉलेज कैंपस के अंदर डॉ. अशोक कुमार की जमीन कैसे ? : जांच कर करवाई की मांग


Nalanda : छोटे मुखिया ने कहा कि कॉलेज कैंपस के अंदर भवन निर्माण का मामला भी अति गंभीर है। किसी कॉलेज के कैंपस के अंदर किसी व्यक्ति की निजी जमीन नहीं होती है। कॉलेज के सचिव माननीय मंत्री श्रवण कुमार को
बताना चाहिए कि किस परिस्थिति में केएसटी कॉलेज के अंदर डॉ अशोक कुमार की जमीन है? डॉ अशोक कुमार ने अपने उम्र को लेकर भी भारी फर्जीवाड़ा किया है। बिहार कॉलेज सेवा आयोग ने इन्हें 5 मई 2003 को इंटरस्तरीय केएसटी कॉलेज का प्राचार्य नियुक्त किया। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के मैट्रिक सर्टिफिकेट में इनकी जन्म तिथि 17 जनवरी 1950 है। सेवा काल 60 वर्ष के आलोक में इन्हें 31 दिसंबर 2010 को रिटायर हो जाना चाहिए था। प्राचार्य पद पर बने रहने के लिए डॉ अशोक कुमार ने तीन बार जन्म लिया है। इनकी दूसरी पैदाइश 5 जनवरी 1951 है और तीसरी 5 जनवरी 1955 है। दरअसल जब-जब इनकी सेवा निवृति नजदीक आती है तो वह फ़र्ज़ी जन्म प्रमाण पत्र पेश कर देते हैं। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि इनकी जन्म तिथि अलग-अलग तीन अवश्य है, पर इन्होंने मैट्रिक की परीक्षा सिर्फ एक ही बार 1967 में पास की है। विवाद होने पर बदल-बदल कर कार्यभार दिया जाता है. छोटे मुखिया ने कहा कि यह श्रवण कुमार के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इस प्रकार जब भी किसी प्रकार का विरोध या वित्तीय मामले पर कोई विवाद होता है तो कथित प्राचार्य डा. अशोक कुमार मंत्री श्रवण कुमार की मदद से कभी स्वयं तो कभी संजीत कुमार को बदल-बदल कर कार्यभार देते रहते हैं। इस प्रकार उक्त तीनों कॉलेज के वित्तीय लूट में लिप्त हैं।

जांच कर करवाई की मांग

हम इसकी जांच की मांग करते हैं और दोषियों पर कड़ी से कड़ी कारवाई करने की मांग करते हैं। भ्रष्ट मंत्री को बचा रही है नीतीश सरकार छोटे मुखिया छोटे मुखिया ने कहा कि बिहार में शिक्षा को बर्बाद करने में सत्ता में बैठे लोगों का बड़ा हाथ है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने सेवानिवृत फर्जी प्राचार्य अशोक कुमार, इंटर के फर्जी
प्राचार्य संजीत कुमार द्वारा जाली दस्तावेज बनाने, फर्जी नियुक्ति करने, फर्जी तरीके से कॉलेज राशि के खाता से निष्कासन, फर्जी डिग्री कॉलेज चलाने, बिहार सरकार से फर्जी रूप से सरकारी अनुदान की प्राप्ति एवं फर्जी तरीके से भुगतान, फर्जी रूप से यू जी सी से विभिन्न मर्दों में फंड प्राप्ति, कॉलेज चपरासी कृष्णा बहादुर के खाते में हेराफेरी कर करोड़ों रूपये की अवैध निकासी की है। छोटे मुखिया ने आरोपों से संबंधित दस्तावेजों को प्रस्तुत करते हुए कहा कि राज्य सरकार आए दिन भ्रष्ट अफसरों के घरों पर छापेमारी कराती है लेकिन घोटालेबाज मंत्रियों को बचा लेती है। हम पूछना चाहते हैं कि सूबे के मुखिया नीतीश कुमार कैसा “सुशासन” और “कानून का राज चला रहे हैं?
इस सन्दर्भ में कुशवाहा न्याय मंच के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र कुशवाहा ने कहा कि कुशवाहा यूथ ब्रिगेड से उनका
कोई सम्बन्ध नहीं है और न ही उन्होंने छोटे मुखिया या किन्हीं अन्य के खिलाफ कोई बयान दिया है। मीडिया में आई ख़बरों को बिलकुल बेबुनियाद व नितांत भ्रामक बताया है।
इस प्रेस कांफ्रेंस में डीपीएस कुशवाहा, भीम कुशवाहा, विजय कुशवाहा, शम्भू कुशवाहा, एनपी कुशवाहा, दिनेश
कुशवाहा, अनुज कुशवाहा, श्रीकांत कुशवाहा, दीपक कुशवाहा, नवीन कुमार, शैलेश यादव, मुन्ना सिंह, जित्तू
यादव, अनुज कुमार यादव, प्रियरंजन पटेल, खुशबू देवी, पंकज पाण्डेय, बिरेश प्रसाद, सोनू कुमार हिंदू एवं ललन
पासवान आदि उपस्थित थे।

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