Mahua Live Nalanda: जगलाल चौधरी की 127 वीं जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई

बिहार शरीफ( नालंद) । प्रखंड के दीपनगर स्थित भीम आर्मी (भारत एकता मिशन) व आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के कार्यालय में जगलाल चौधरी का 127 वीं जयंती धूमधाम के साथ मनाई गई। इस मौके पर जगलाल चौधरी के जीवनी पर प्रकाश डाला गया एवं चर्चा की गई। भीम आर्मी (भारत एकता मिशन) व आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के जिला महासचिव रामदेव चौधरी एवं जिला प्रभारी रंजीत कुमार चौधरी ने संयुक्त रूप से कहा कि स्वतंत्रता सेनानी जगलाल चौधरी जी का जन्म 5 फरवरी 1895 को एक निर्धन अशिक्षित पासी जाति के परिवार में हुआ था इनके पिता का नाम मुसन चौधरी एवं माता का नाम तेतरी देवी था इनके बड़े भाई भीष्म चौधरी फौजी थे जिन्होंने अपने अनुज के लिए समय पर तनख्वाह से पैसा बचाकर भेजा और श्री जगलाल चौधरी के पढ़ने के हौसले को बुलंद रखा जगलाल चौधरी बिहार के गांधी नाम से चर्चित स्वतंत्रता सेनानी व पूर्व मंत्री जगलाल चौधरी एक प्रखर समाज सुधारक भी थे जो महिलाओं के अधिकारों दलितों की मुक्ति शिक्षा और बिहार में भूमि सुधार के लिए हमेशा याद किए जाते रहेंगे जगलाल चौधरी ने कुर्सेला स्टेट के जमींदार के उम्मीदवार को चुनाव में पराजित किया था।जगलाल चौधरी आजीवन सत्ता स्वार्थ लौलुप्य एवं दलगत राजनीति से अपने को अलग रखा। वे आध्यात्मिक नेता के साथ-साथ एक अच्छे चिकित्सक भी थे। इन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्रभक्ति व समाज की सेवा में बिता दिया स्वास्थ्य मंत्री रहने के बावजूद जिस सादगी से वे रहा करते थे इससे हम लोगों को सीख लेनी चाहिए जगलाल चौधरी पहली बार 1937 में कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में बिहार विधानसभा के लिए चुने गए थे और चौथे मंत्री बने। तब बिहार में सिर्फ चार ही मंत्री बनते थे 1938 में सर्वप्रथम समाज हित के लिए बिहार प्रदेश में उन्होंने ही मध्य निषेध कानून लागू करवाया था बिहार में शराबबंदी कानून लागू करने की हिम्मत चौधरी जी ने ही उस दौरान की थी जब देश में शराब और अंधविश्वास का बोलबाला था आबकारी मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने बिहार में शराबबंदी कानून लागू की और शिक्षा का प्रचार प्रसार पर व्यापक जोर दिया। 14 अगस्त 2000 को जगलाल चौधरी के नाम पर भारत सरकार ने डाक टिकट जारी पर सम्मानित किया था। सन 1921 में महात्मा गांधी के संपर्क में आए।वर्ष 1932 के नमक आंदोलन में वह जेल भी गए। आज के समय में इनसे सीख लेने की जरूरत है।इनकी मृत्यु 1975 को हो गई थी।इस मौके पर उपस्थित लोगों ने इनके बताए हुए रास्तों पर चलने का संकल्प लिया।इस अवसर पर वीरेंद्र चौधरी अजय कुमार चौधरी गुड़िया बौद्ध परी बौद्ध चांदनी देवी शंकर बौद्ध आदि दर्जनों लोग उपस्थित थे।

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