सीतामढ़ी : टीबी रोग की पाठशाला में बैठे बच्चे, मिली टीबी के लक्षण और बचाव की जानकारी


-उच्च माध्यमिक विद्यालय बथनाहा में एडवोकेसी कम्युनिकेशन एंड सोशल मोबलाइजेशन कार्यक्रम का आयोजन

सीतामढ़ी। 21 सितंबर

प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत बुधवार को उच्च माध्यमिक विद्यालय बथनाहा में एडवोकेसी कम्युनिकेशन एंड सोशल मोबलाइजेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बच्चों को टीबी के लक्षण और बचाव की जानकारी दी गई, ताकि बच्चों में जागरूकता आए। वह खुद और अपने आसपास के लोगों को इस बीमारी से बचा सकें। जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार ने बच्चों से कहा कि अगर आपके घर के आस पास किसी व्यक्ति को लगातार खांसी और बुखार आ रहा है तो उसे सरकारी अस्पताल जाने के लिए प्रेरित करें। उसकी जांच अवश्य करवाएं। टीबी रोग की समस्त जांच और दवाइयां सरकार की तरफ से अस्पताल में मुफ्त हैं। उन्होंने बच्चों को बताया कि इससे बचाव के लिए रोगी से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। यह रोग संक्रामक है। मरीज के बर्तन व कपड़े अलग रखने चाहिए। स्वयं भी खांसते समय अपने मुंह पर कपड़ा रखें। 

सभी लोगों का जागरूक होना जरूरी- 

टीबी रोग को पूरी तरह से खत्म करने के लिए सभी लोगों का जागरूक होना जरूरी है। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग का पूरा प्रयास है कि एक भी टीबी मरीज जानकारी के अभाव में उपचार से वंचित नहीं रहने पाए, इसके लिए लगातार विभाग की तरफ से समय-समय पर एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान चलाया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि वे अपने घरों व आसपास में रहने वाले लोगों को टीबी रोग के बारे में बताएं।

आमजन का सहयोग जरूरी-

डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि भारत सरकार ने 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। जो आम जन के सहयोग के बिना संभव नहीं है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी खोजी अभियान में सहयोग दें। उन्होंने बताया कि सीने में दर्द होना, चक्कर आना, दो सप्ताह से ज्यादा खांसी या बुखार आना, खांसी के साथ मुंह से खून आना, भूख में कमीं और वजन कम होना आदि लक्षण अगर किसी में है तो जाकर टीबी की जांच करा सकते हैं। अधिक से अधिक लोग टीबी के लक्षणों के बारे में जानें और अपने आसपास रहने वाले लोगों में यदि इनमें में से कोई लक्षण दिखे तो जांच के लिए प्रेरित करें। 

किसी को भी हो सकता टीबी-

डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि लोगों को यह नहीं सोचना चाहिए कि टीबी हमें नहीं हो सकता। अमीर हो या गरीब, टीबी किसी को भी हो सकता है। टीबी जात-पात, ऊंच-नीच नहीं देखता। इसलिए लोगों को यह भ्रम निकाल देना चाहिए। उन्होंने बताया कि टीबी मुक्त जिला बनाने के लक्ष्य के साथ यक्ष्मा केंद्र के कर्मी लगातार प्रयास कर रहे हैं। विभिन्न स्तरों पर काम कर रहे हैं। टीबी उन्मूलन के लक्ष्य के साथ कर्मी दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों तक  दौरा कर रहे हैं। टीबी मरीजों से मिल रहे हैं। उन्हें समझा रहे हैं, ताकि उनका हौसला बढ़ा रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में भी पर्यवेक्षकों द्वारा मरीजों का समुचित ध्यान रखा जा रहा है। क्षेत्र भ्रमण कर वे टीबी मरीजों के दवा सेवन, उनके खानपान, रहने व सोने के तरीकों, मास्क के उपयोग समेत अन्य दिनचर्या की जानकारी दे रहे हैं। इस अवसर पर राष्ट्रीय कार्यक्रम पदाधिकारी बथनाहा, डीपीसी, एसटीएस, बीसीएम उपस्थित रहे।

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