मोतिहारी : टीबी रोगियों का हो रहा है फॉलोअप


  • दवाई खाना बीच में नहीं छोड़ने की नसीहत
  • जिले में टीबी के कुल 4710 मरीज, सरकारी अस्पतालों में 2752 एवं निजी तौर पर 1958 मरीज करा रहे हैं इलाज
  • इलाज करा रहे टीबी मरीजों को मिलती है मदद

मोतिहारी , 13 सितम्बर

जिले के सीडीओ डॉक्टर रंजीत राय ने बताया कि भारत सरकार का लक्ष्य वर्ष 2025 तक भारत से टीबी को समाप्त करने का हैं। इसे लेकर पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर में टीबी के खिलाफ मुहिम चलाया जा रहा है। जिसके अंतर्गत टीबी रोगियों की खोज के साथ उनका फॉलोअप किया जा रहा है। देखा जा रहा है कि वे समय पर दवा खा रहे हैं या नहीं। उन्होंने बताया कि साल 2022 में अभी तक जिले में टीबी के कुल 4710 मरीज हैं, जिनमें सरकारी अस्पतालों में 2752 एवं निजी तौर 1958 मरीज इलाज करा रहे। उन्होंने बताया कि जिला टीबी अस्पताल के साथ अन्य कई स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी के मरीजों की जाँच व इलाज की मुफ्त व्यवस्था की गई है।

इलाज करा रहे टीबी मरीजों को मिलती है मदद-

डॉ रंजीत राय ने बताया कि मरीजों को निक्षय पोषण योजना के तहत डीबीटी के माध्यम से प्रति माह 500 रुपये की पोषाहार की राशि सहायता के रूप में दी जाती है।

दवाई खाना बीच में न छोड़ें, डोज पूरी करें-

डॉ रंजीत राय ने बताया कि क्षय रोग की दवा बीच में छोड़ना खतरनाक है। पूरा कोर्स करना जरूरी है। बीच में दवा छोड़ने से वे पुनः टीबी के शिकार बन जाते हैं, जिनका उपचार मुश्किल हो जाता है।

टीबी उन्मूलन के लिए जागरूकता जरूरी-

जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ रंजीत राय ने बताया कि यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम की सफलता के लिए लोगों को जागरूक किया जाना आवश्यक है। इसके लिए दूरस्थ एवं चिह्नित कठिन क्षेत्रों में आशा एवं अन्य सामुदायिक उत्प्रेरक द्वारा गृह भ्रमण कर संभावित टीबी रोगियों की पहचान करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि टीबी की जाँच के लिए लोगों को स्थानीय निकटतम बलगम जांच केंद्र अथवा ट्रुनेट लैब में सैंपल की जांच करवाना चाहिए।

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