सीतामढ़ी : समाज से कुपोषण का कलंक मिटाने का लिया संकल्प


-संवर्धन योजना के तहत जिला स्वास्थ्य समिति में एएनएम को किया गया प्रशिक्षित 

सीतामढ़ी। 13 सितंबर

कुपोषण देश के लिए बड़ी समस्या है। यह चुनौती के रूप में खड़ी है। इससे निपटने के लिए राज्य के पांच आकांक्षी जिलों में संवर्धन योजना चल रही है। इन पांच जिलों में एक सीतामढ़ी भी शामिल है। जहां के चयनित आंगनबाड़ी केंद्रों पर 0-59 महीने के अति कुपोषित बच्चों की पहचान कर सुपोषित करने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान को लेकर जिला स्वास्थ्य समिति में मंगलवार को एएनएम को प्रशिक्षित किया गया। मुख्य प्रशिक्षक (प्रोग्राम सलाहकार) पल्लवी कुमारी ने बताया कि संवर्धन कार्यक्रम के तहत एएनएम की भूमिका आंगनबाड़ी द्वारा चिन्हित अति कुपोषित बच्चों की पोषण स्थिति सुनिश्चित कर उनकी स्वास्थ्य जांच करना, भूख की स्थिति जांचना है। इसके बाद चिकित्सीय समस्या वाले कुपोषित बच्चे और कम भूख लगने वाले बच्चे को एनआरसी में भर्ती कराना है। इसके अलावा वैसे बच्चे जिनमें चिकित्सीय समस्या नहीं है और भूख भी अच्छे से लग रही है, उनका पंजीकरण संवर्धन कार्यक्रम में करना है। पंजीकृत बच्चों को चार माह तक दवाइयां, घरेलू स्तर पर तैयार खाद्य सामग्रियों से संवर्धन करना है। इन सभी बिंदुओं पर प्रशिक्षण कार्यक्रम में एएनएम को बताया गया। इस अवसर पर पिरामल के जिला प्रोग्राम लीड दिव्यांक श्रीवास्तव ने बताया कि संवर्धन योजना के तहत विभाग के कर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। ताकि समाज से कुपोषण नाम का कलंक मिट जाए। 

समन्वय से आएगी कुपोषण दर में कमी- 

प्रशिक्षण कार्यक्रम में सिविल सर्जन ने कहा कि  समन्वय से काम करते हुए कुपोषण की दर में कमी लाई जा सकती है। उद्देश्य की प्राप्ति हेतु पूरे लगन और समर्पण से कार्य करने की जरूरत है। जरूरतमंद को इस योजना का समुचित लाभ प्रदान करें। समाज के वंचित तबके में अभियान चलायें एवं ऑगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से पोषण  की अलख जगाएं। उन्होंने बताया कि कुपोषण के खिलाफ जारी लड़ाई में जागरूकता मजबूत हथियार है। इसलिए आम लोगों में जागरूकता भी फैलाते रहें। 

कार्यक्रम के 10 चरण होंगे महत्वपूर्ण-

संवर्धन कार्यक्रम को कुल 10 चरणों में संपादित किया जा रहा है। जिसमें सामुदायिक मोबिलाईजेशन एवं सभी बच्चों की पोषण स्थिति का आंकलन, चिकित्सीय जाँच, भूख की जाँच, अति गंभीर कुपोषित बच्चों के प्रबंधन के तरीके, दवाइयां, पोषण, पोषण -स्वास्थ्य शिक्षा, संवर्धन कार्यक्रम के दौरान पोषण की निगरानी, संवर्धन कार्यक्रम से छुट्टी देने के बाद फॉलोअप शामिल है। साथ ही समुदाय आधारित देखभाल को मजबूती देने के लिए आरोग्य दिवस, घर पर बच्चों की देखभाल एवं गृह भ्रमण में सेविका एवं आशा द्वारा दी जाने वाली परामर्श शामिल है। इन सभी चरणों से जिले में कुपोषण पर चोट किया जा रहा है। इस अवसर पर डीपीएम असित रंजन, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के डॉ. राजेंद्र प्रसाद, जिला सलाहकार सुनील कुमार, पीएचडी स्कॉलर ज्योतिर्मयी साहू, दिव्यांशु कुमार, मो. शरीफ, मनीष आदि उपस्थित रहे।

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