बिहार में पॉलीथिन बैन लेकिन चौथी बार भी नालंदा में बेअसर


• सब्जी व फल सहित मछली बेचने वाले दे रहे पॉलीथिन में सामान

• प्रशासन की अनदेखी व दुकानदारों में जागरूकता की कमी के कारण होता दिख रहा बेअसर

• सबसे पहले 2013 में लगी थी शहर में पॉलीथिन के उपयोग पर पाबंदी 

नालंदा : एक जुलाई से चौथी बार पॉलीथिन पर लगी पाबंदी भी बेअसर दिख रही है। शहर के बस स्टैंड का इलाका हो, भरावपर  सब्जी मंडी हो, सोहसराय बाजार के पास सब्जी विक्रेता हो, बाजार के राशन दुकानदार, मछली दुकानदार, मोबाइल कवर बेचने वाली दुकानों सहित अन्य जगहों पर पॉलीथिन दिया जा रहा है।दुकानदारों ने बताया कि उनके पास अगर पहले से साड़ी या अन्य कपड़ा जो पैक रहता है उस प्लास्टिक के उपर भी निगम के लोगों का एतराज हो रहा है। ऐसे में काफी परेशानी हो रही है।  मोबाइल कवर वाले दुकानों में तो वैसे प्लास्टिक की भरमार है। वहीं वही कर्मी शाम के समय अपने हाथों में पॉलीथिन में सब्जी व अन्य सामान लिये नजर आ जाते हैं।

पर्यटक नगरी राजगीर में भी धरल्ले से प्लास्टिक का हो रहा उपयोग

पर्यटक नगरी में इससे पहले तीन बार पॉलीथिन पर पाबंदी लगायी जा चुकी है। एक भी बार सफल नहीं हो सकी। इसके पीछे प्रशासनिक अनदेखी ही मूल कारण रही है। पहली बार पर्यटक नगरी को पॉलीथिन मुक्त बनाने के लिए वर्ष 2013 में तत्कालीन एसडीओ रचना पाटिल ने राजगीर में एक दिसम्बर 2013 से पॉलीथिन के उपयोग पर अनुमंडल प्रशासन द्वारा पाबंदी लगायी थी। उन्होंने उस समय सरकारी दफ्तरों में भी प्लास्टिक के उपयोग पर मनाही कर दी थी। पकड़े जाने पर जुर्माना रखा था। छापामार दल का गठन किया था। लोगों में जागरूकता अभियान चलाया था कि वे कागज के ठोंगे का उपयोग करें और जुट का थैला लेकर बाजार जाएं। इसका असर भी हुआ था।उनके जाने के बाद यह योजना दम तोड़ दी थी और राजगीर जो बिहार में पॉलीथिन पांबदी के लिए पहला शहर बनने वाला था वह अधूरा ही रह गया था। दूसरी बार एक अप्रैल 2016 से डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम की पहल पर दूसरी बार राजगीर में पॉलीथिन के उपयोग पर पाबंदी लगायी गयी थी। तत्कालीन एसडीओ लाल ज्योति नाथ शाहदेव ने इसे सफल बनाने के लिए शहर में तत्कालीन नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी व सिटी मैनेजर सहित अन्य पदाधिकारियों को लेकर एक छापामार दल गठित किया था। पाबंदी के कुछ दिन बाद तक यह सिलसिला चला।

कुछ दिन तक प्रशासन के लोग दुकानों में जाकर छापेमारी की और लोगों को इसके उपयोग न करने की सलाह दी। इसका असर भी लोगों व दुकानदारों पर होने लगा था। लोग पॉलीथिन की जगह जुट के थैले लेकर बाजार आने लगे थे। लेकिन, महज कुछ दिन बाद प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी व फुटपाथी दुकानदारों की मनमानी के कारण यह योजना दम तोड़ दी। अब तीसरी बार भी कोर्ट की पहल पर 23 दिसम्बर 2019 को पॉलीथिन के उपयोग पर पाबंदी लगायी गयी थी। यह भी बेअसर रही। अधिकारियों की सुस्ती दुकानदारों की मनमानी के आगे यह पाबंदी का असर शहर में नहीं दिखा। अब चौथी भी महज कुछ ही दिन बाद यह दम तोड़ती नजर आ रही है। अब तक अनुमंडल प्रशासन ने कोई पहल नहीं की गयी।

शहर के कई इलाकों में कूड़े कचरों में देखा जा रहा है प्लास्टिक का अंबार

बिहारशरीफ शहर के कई मोहल्ले में कूड़े कचड़े फेंके जाने वाले जगहों पर भारी मात्रा में प्लास्टिक पदार्थ देखा जा रहा है। ऐसा दृश्य देखने के बाद भी प्रशासन की ओर से प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। बिहार में पहले शराबंदी कानून बेअसर है तो अब बिहार में प्लास्टिक पर प्रतिबंध भी बेअसर दिख रहा है।

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