जनता को शिक्षित, सद्गुणी और बौद्धिक होना ही चाहिए : डॉ प्रभास कुमार

मूल्यपरक शिक्षा से ही समाज में फैलेगा ज्ञान का उजाला: डॉ ध्रुव कुमार

बिहार शरीफ(नालंदा) I नालंदा कॉलेज दर्शनशास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ प्रभास कुमार ने कहा है कि वे सोमवार को बीएड विभाग में ” शिक्षाशास्त्र का दर्शन ” विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित कर रहे थे I उन्होंने सुकरात, प्लेटो, अरस्तू और जे एस मिल के विचारों के संदर्भ में मनुष्य के सद्गुणों को स्पष्ट करते हुए कहा जनता को शिक्षित, सद्गुणी और बौद्धिक होना चाहिए। शिक्षा-दर्शन वास्तव में दर्शन ही होता है, क्योंकि उसमें भी अन्तिम सत्यों, मूल्यों, आदर्शों, आत्मा-परमात्मा, जीव, मनुष्य, संसार, प्रकृति आदि पर चिन्तन एवं उसके स्वरूप को जानने का प्रयास किया जाता है। वस्तुत: ” शिक्षा- दर्शन” शिक्षाशास्त्र की वह शाखा है, जिसमें शिक्षा के सम्प्रत्ययों, उद्देश्यों, पाठ्यक्रम, शिक्षण विधियों एवं शिक्षा सम्बन्धी अन्य समस्याओं के सन्दर्भ में विभिन्न दार्शनिकों एवं दार्शनिक सम्प्रदायों के विचारों का आलोचनात्मक अध्ययन किया जाता है।

नालंदा कॉलेज बीएड में ” शिक्षाशास्त्र का दर्शन ” विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित

उन्होंने कहा कि शिक्षा तथ्यात्मक और मूल्यात्मक दोनों रूपों में मौजूद है Iकार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ ध्रुव कुमार ने शिक्षा एवं दर्शन के अंतर्संबंध को स्पष्ट करते हुए कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जिसके द्वारा दर्शन के सिद्धान्तों को अगली पीढ़ी तक पहुँचाया जा सकता है और संवर्धित- संरक्षित किया जा सकता है I डॉ ध्रुव ने कहा कि विश्व में जितने भी महान शिक्षाशास्त्री हुए हैं, वे सब के सब दार्शनिक भी रहे हैं।व्याख्यान के पश्चात डॉ प्रभास ने शिक्षकों और छात्रों की अनेक जिज्ञासाओं का समाधान किया Iइस मौके पर उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ एस. रहमान, डॉ रंजन कुमार, अपर्णा कुमारी, पिंकी कुमारी, इशिता, प्रशांत, उषा कुमारी, कृति स्वराज सहित अनेक शिक्षक मौजूद थे I

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