Mahua Live Nalanda: माँ शीतला के नगरी मघड़ा में उमड़ा आस्था का जनसैलाब

बिहार शरीफ(नालंदा) । मघड़ा में स्थापित विश्व प्रसिद्ध सिद्धपीठ माता शीतला मंदिर में चैत्र कृष्ण पक्ष अष्टमी को पूजा अर्चना के लिए अहले सुबह से श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। बिहारशरीफ से तीन किलोमीटर दूर मघड़ा गांव में विश्व प्रसिद्ध सिद्धपीठ माता शीतला मंदिर स्थापित है। जहां चैत्र कृष्ण पक्ष अष्टमी को भक्त मां के दरबार आते हैं । पूजा-अर्चना से पहले तालाब में स्नान करने की परंपरा है। ऐसी मान्यता है कि इस तालाब में स्नान करने से लोग चेचक रोग से मुक्त हो जाते हैं। हर साल चैत्र कृष्ण पक्ष अष्टमी के दिन मां की विशेष पूजा की जाती है। इसके अलावा हर मंगलवार को भी मां के मंदिर में भक्तों की भीड़ जुटती है। इस बार चैत्र कृष्ण पक्ष अष्टमी शुक्रवार को है। माता के दरबार में दो साल बाद  पूजा-अर्चना के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ी । वहीं मेले का भी आयोजन किया गया जिसमें मनोरंजन के लिए कई तरह के खेल तमाशे और झूले लगाये गए हैं | जिसका लोगों ने जमकर लुफ़्त उठाया |  हर साल की तरह इस साल भी इन गांवों के लोग गुरुवार की शाम में खाना बनाने के बाद अपने-अपने घरों की साफ-सफाई करेंगे। सोमवार यानी अष्टमी के दिन गांव के किसी घर में चूल्हा नहीं जलेगा। रात में बनाये गये खाने को लोग बसिऔड़ा के प्रसाद के रूप में ग्रहण करेंगे। ऐसी मान्यता है कि गांव के एक ब्राह्मण को रात में माता स्वप्न में आई। माता ने बताया कि उनकी मूर्ति नदी के किनारे जमीन के अंदर है। उसे गांव के किसी स्थान पर स्थापित कर पूजा-अर्चना करें। इसके बाद ब्राह्मण ने नदी के किनारे स्थित एक कुएं की खुदाई कर मां शीतला की प्रतिमा को निकाला तथा उसे गांव के तालाब के बगल में स्थापित कर दिया। जिस कुएं से मां की प्रतिमा निकली थी, उसे मिट्ठी कुआं के नाम से जाना जाता है। मघड़ा के ग्रामीण बताते हैं कि मिट्ठी कुआं का पानी कभी नहीं सुखता है तथा पानी काफी मिट्ठा है। पुजारी जी बताते हैं कि जिस दिन मां की प्रतिमा कुएं से निकाली गयी थी, उस दिन चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमी थी तथा अष्टमी के दिन मां की प्रतिमा की स्थापना हुई। उसी समय से मघड़ा में मेले की शुरुआत हुई, जो अबतक जारी है।

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