Mahua Live Nalanda: गिरियक प्रखंड के बकरा गांव में हजरत दाऊद शहीद, बैरम खान व पीर बालक के मजार पर की गई चादरपोशी।

उर्स मेले का हुआ आयोजन

Mahua Live Nalanda: गिरियक प्रखंड के बकरा गांव में उर्दू के 22 तारीख और हिंदी पंचांग के अनुसार 29 अक्टूबर शुक्रवार की देर शाम को दाऊद शहीद के मजार पर चादर पोशी की गई और उर्स मेले का आयोजन किया गया। यह उर्स मेला हर साल बारह रबी ऑवल को होता है। पिछले साल कोरोना को लेकर बिल्कुल सादगी तरीके से चादर पोशी की गयी थी जबकि इस बार बड़े ही धूमधाम से बाजे गाजे के साथ सरकारी चादर निकाला गया।
बता दें कि बाबा के नाम से प्रत्येक साल मेला लगता है। उर्दू के ब्राह्वफ़ात यानी बारह रबी ऑवल के 22 तारीख को यह आयोजन होता है । इसीको लेकर बड़े ही धूमधाम से बकरा गांव स्थित हजरत दाऊद शहीद, बैरम खान और पीर बालक के मजार पर चादर पोशी किया जाता है।बकरा गांव के हजरत दाऊद शहीद के रखवाले बाबा मस्तान का कहना है कि यहां प्रत्येक साल उर्दू के 22 तारीख बारह रबी ऑवल को सामूहिक रूप से सरकारी चादर पोशी की जाती है और मेला लगता है । इस रोज का लोगों को शिद्दत से इन्तेजार रहता है। लोग मेला देखने के लिए दूर-दूर के गांव से आते हैं। इसमें सभी जाति धर्म के लोग शामिल होते हैं। यहां हजरत दाऊद के मजार पर चादर पोशी के लिए हिंदू न मुस्लिम किसी जात पात का भेदभाव नहीं होता और सभी धर्म जाति के लोग अपने मन्नत मांगते हैं जिनकी मुरादें पूरी होती है । लोग अपनी मन्नतें पूरी होने के लिए बाबा के मजार पर आते हैं और चादर पोशी कर नजरो नियाज करवाते हैं। मस्तान बाबा का कहना है कि जो लोग हजरत के दरबार में आकर मन्नत मांगते हैं । उनकी मन्नतें पूरा होती है । साथ ही जिनकी मन्नतें पूरी हो जाती वे लोग बड़े ही धूम धाम से हजरत के मजार पर हर साल चादर चढ़ाते हैं। बताते चलें कि इस मजार का चार साल पूर्व जीर्णोंउद्धार कर मो अशरफ आलम एवम कुछ सहयोगियों ने मिलकर मजार के चारों ओर आकर्षक और सुंदर तरीके से बनवाया जिसके बाद से हजरत के मजार काफी सुंदर एवं साफ सफाई देखने को मिलता है।

गिरियक से मोहम्मद निसार अंसारी की रिपोर्ट

मस्तान बाबा कहते हैं कि दरगाह तक जाने के लिए बकरा रोड से रास्ता नहीं है। बरसात के मौसम में बच्चे, बूढ़े महिलाएं-पुरुष सभी कीचड़ से गुजरकर चादर पोशी करना पड़ता है क्योंकि इसके अलावा और कोई रास्ता भी नहीं है। श्राद्धालू सिर्फ एक छोटा सा कियारी के सहारे मजार तक आना पड़ता है। ग्रामीणों ने कहा कि बच्चे, बूढ़े महिला पुरुष काफी संख्या में लोग इस उर्स में शामिल होते हैं । लोगों ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि जल्द से जल्द इसका हल निकाला जाए क्योंकि सरकारी चादर के साथ काफी संख्या में लोग शामिल होते और चादर पोशी करने के लिए नदी से होते हुए मजार के पास आते हैं । लोगों ने बताया कि और ना यहां कल की व्यवस्था है। अगर लोग को प्यास लगने पर उनको घर जाना पड़ेगा ।यहां के विधायक कौशल किशोर और ग्रामीण मंत्री श्रवण कुमार से मांग कर रहे हैं कि जल्द से जल्द इसका उपाय किया जाए।

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