Mahua Live Nalanda: केन्द्रीय विदेश एवं शिक्षा राज्य मंत्री के स्वागत को नालंदा विवि तैयार।

दो दिवसीय दौरे पर आयेंगे केन्द्रीय विदेश मंत्री डॉ. राजकुमार रंजन सिंह

विवि के विकास योजनाओं का लेंगे जायजा :

Mahua Live Nalanda:-केन्द्रीय विदेश एवं शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. राजकुमार रंजन सिंह का स्वागत के लिए नालंदा विश्वविद्यालय पूरी तरह से तैयार है। डॉ. सिंह विश्वविद्यालय के परियोजनाओं की प्रगति को देखने के लिए दो दिवसीय दौरे पर राजगीर आयेंगे। यह जानकारी मीडिया समन्वयक सह सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रांशु समदर्शी ने दी। उन्होंने बताया कि कैम्पस को नेट जीरो कैम्पस बनाया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजगीर की पहाड़ियों की तलहट्टी में विवि को 455 एकड़ जमीन उपलब्ध करवायी। नीतीश कुमार ने यह नालंदा विश्वविद्यालय को पुनर्जीवित करने के लिए किया। इससे नालंदा का गौरव दोबारा से उसी तरह से प्राप्त हो जिस तरह से प्राचीन काल में पूरी दुनिया के लोग नालंदा ज्ञान पाने आते थे। नालंदा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सुनैना सिंह के प्रयास से नालंदा विश्वविद्यालय तेजी से विकास कर रहा है। प्राचीन भारतीय स्वदेशी ऊर्जा मॉडल द्वारा निर्देशित, एक स्थायी परिसर के निर्माण की राह पर है। उनकी देखरेख में महज तीन सालों में ही यह विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य 80 फीसदी पूरा हो गया है। यह अपने आप में एक मिसाल है। पिछले तीन सालों में विश्वविद्यालय में 6 स्कूल और 12 शैक्षणिक कार्यक्रमों की शुरूआत की गयी है।

ऊर्जा संकट को दूर करने का भी हुआ है प्रयास :
नालंदा विवि में ऊर्जा संकट को दूर करने का भी प्रयास किया गया है। पर्यावरण संरक्षण के लिए 200 नेट जीरो एनर्जी भवन बनाये गये हैं। यह पूरा होने को हैं। कोरोना जैसी महामारी के बाद भी विश्वविद्यालय में शैक्षणिक कार्यक्रम होती रही। प्रकृति के साथ सद्भाव का भी ख्याल रखा जाता है। शिक्षा राज्य मंत्री के आने से छात्रों में नयी ऊर्जा का संचार होगा। टीम नालंदा को प्रगति का मूल्यांकन करने का एक बेहतर अवसर मिलेगा। डॉ. सिंह की यह यात्रा ज्ञान के प्राचीन केन्द्र नालंदा के प्रति भारत सरकार और विदेश मंत्रालय की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। नालंदा विश्वविद्यालय कार्बन न्यूट्रल और जीरो वेस्ट कैम्पस के मॉडल के तौर पर अनुकरणीय उदाहरण बन गया है। नालंदा विश्वविद्यालय आसियान-इंडिया नेटवर्क ऑफ यूनिवर्सिटीज के माध्यम से आसियान देशों के शैक्षणिक संस्थानों से जुड़ने के लिए एक नोडल एजेंसी होने के नाते भारती की एक्ट ईस्ट नीति में एक अहम भूमिका निभायेगा।

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