Mahua Live Nalanda: ककड़िया विद्यालय में “मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता” विषय पर परिचर्चा का आयोजन।

Mahua Live Nalanda:-मध्य विद्यालय ककड़िया में 29 वां विश्व स्वास्थ्य मानसिकता दिवस पर शिक्षा विभाग के आदेशानुसार “मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता” विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता प्रधान शिक्षक शिवेन्द्र कुमार ने किया।
मौके पर विद्यालय के शिक्षक शिक्षाविद् राकेश बिहारी शर्मा ने विश्व स्वास्थ्य मानसिकता दिवस के बारे में विस्तार से बताया कि बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के निर्देश पर आज नालंदा में पहली बार विद्यालयों में 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया गया है। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य एक ऐसा विषय है जो हमारे जीवन में बेहद अहमियत रखता है, फिर भी ज्यादातर लोग इसकी अनदेखी ही करते हैं। कोरोना के इस दौर में तो सोशल डिस्टेंसिंग, आइसोलेशन के कारण ये समस्याएं और भी बढ़ गई हैं। ऐसे में ‘मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता’ ये विषय और भी ज्यादा प्रासंगिक हो गया है। आज के दिन पूरी दुनिया में वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस सबसे पहले वर्ष 1992 में यूनाइडेट नेशन्स के उप महासचिव रिचर्ड हंटर और वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ की पहल पर सबसे पहले इस दिन को मनाया गया था। इस वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य संगठन में लगभग 150 से अधिक देशों के सदस्यों का संगठन है। 1994 में संयुक्त राष्ट्र के तत्कालीन महासचिव यूजीन ब्रॉडी ने एक थीम तय कर इस दिवस को मनाने की सलाह दी थी। इसके बाद से ही प्रतिवर्ष 10 अक्तूबर को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता बढ़ाने को लेकर दुनिया भर में तरह-तरह के कार्यक्रम किए जाते हैं। इस वर्ष विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर ‘एक असमान दुनिया में मानसिक स्वास्थ्य’ थीम है। उन्होंने कहा चिंता चिता के समान माना गया है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। ज्यादातर लोग इसे बीमारी के लक्षण नहीं मानते व डॉक्टर से परामर्श नहीं लेते जिसका नुकसान मरीज को भुगतना पड़ता है। उन्होंने कहा कि विश्व में प्रत्येक चार व्यक्तियों में से एक व्यक्ति अपने जीवन के किसी न किसी मोड़ पर मानसिक विकार से प्रभावित हो रहे हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रधान शिक्षक शिवेन्द्र कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि विद्यार्थियों को तनाव से बचने के लिए सर्वप्रथम स्वयं को पहचान कर अपनी क्षमता के अनुरूप पूर्व कार्ययोजना तैयार कर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ाना चाहिए, ऐसा करने से व्यक्ति कठिन से कठिन परिष्थितियों में भी तनाव रहित रह सकता है।
शिक्षक सुरेन्द्र कुमार ने विद्यार्थियों व अभिभावकों के बीच कहा कि खासकर युवाओं को अपने मन की बात माता-पिता या किसी विश्वसनीय मित्र से अवश्य कहनी चाहिए। ताकि मन पर कोई बोझ न रहे।
शिक्षक सच्चिदानंद प्रसाद ने कहा कि जीवन में सफल होने के लिए जितना आवश्यक बौद्धिक योग्यताओं की है उससे भी अधिक महत्वपूर्ण स्वस्थ मानसिकता है।
इस दौरान परिचर्चा में शिक्षक रणजीत कुमार, शिक्षक अनुज कुमार, विद्यालय शिक्षा समिति के सचिव निभा देवी, गीता देवी, मारो देवी, छात्र टुनटुन कुमार, वीरमणि कुमार, दशरथ कुमार, कौशल कुमार छात्रा सुंदरी कुमारी, मायावती कुमारी सहित कई ग्रामीणों ने भाग लिया।

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