जिले में 17 से 19 मई तक होगा नाइट ब्लड सर्वे

सर्वे के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को किया गया प्रशिक्षित

NALANDA । सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग फाइलेरिया उन्मूलन के लिए संकल्पित है. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग एवं प्रशासनिक स्तर पर जरुरी निर्णय लिए जा रहे हैं. इसी क्रम में नालंदा सहित राज्य के दरभंगा, लखीसराय, नवादा, समस्तीपुर एवं रोहतास जिलों में किया जाना है. रात्रि रक्त पट संग्रह में 4 रैंडम साइट्स एवं 4 सेंटिनल साइट्स का चुनाव कर कुल 4000 ब्लड स्लाइड्स एकत्रित किया जाना है. नालंदा जिले में मई महीने की 17 से 19 तारीख में नाईट ब्लड सर्वे का काम संपादित किया जायेगा. इसके लिए जिलास्तर पर सभी जरुरी तैयारी कर ली गयी है.रात्रि रक्त पट संग्रह अभियान को सफल बनाने के लिए इससे जुड़े स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है. प्रशिक्षण पाने वालों में लैब तकनीशियन, आशा कार्यकर्ता, बीसीएम, बीएचएम एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं. 17 से 19 मई के दौरान यही कर्मी नाईट ब्लड सर्वे का कार्य पूरा करेंगे.
8 प्रखंडों से लिए जायेंगे सैंपल:
जिले के 8 प्रखंडों से नाईट ब्लड सर्वे के लिए सैंपल लिए जायेंगे. इनमे 4 स्थायी साईट हिलसा प्रखंड के मई, बिहारशरीफ प्रखंड के महलपर, एकंगरसराय के तेल्हाड़ा एवं अस्थांवा प्रखंड के बलवापर से सैंपल एकत्रित किये जायेंगे. इसके अलावा 4 रैंडम साईट हरनौत प्रखंड के डिहरीगढ़, नगरनौसा प्रखंड के रामघाट, थरथरी प्रखंड के भतहर एवं परवलपुर प्रखंड के मई से सैंपल एकत्रित किये जायेंगे. फाइलेरिया उन्मूलन के लिए समुदाय का जागरूक होना जरुरी- डॉ. राम कुमार प्रसाद जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. राम कुमार प्रसाद ने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन के लिए समुदाय में जागरूकता आनी चाहिए. ससमय लक्षणों की पहचान एवं तत्काल चिकित्सीय प्रबंधन से पीड़ित व्यक्ति को लाभ मिल सकता है. अगर फाइलेरिया का इलाज समय पर नहीं शुरू होता है, तब यह बीमारी लाइलाज बन जाती है. इस बीमारी की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संक्रमित होने के तीन से 15 साल बाद इसकी जनकारी होती है. ऐसे में लोगों को फाइलेरिया के लक्षणों की पहचान जरूरी है. जिससे समय पर संक्रमित लोगों का इलाज शुरू हो सके. यदि ज्यादा दिनों तक बुखार रहे, पुरुष के जननांग में या महिलाओं के स्तन में दर्द या सूजन रहे और खुजली हो, हाथ-पैर में भी सूजन या दर्द रहे तो यह फाइलेरिया होने के लक्षण हैं. फाइलेरिया से संक्रमित हो जाने पर लंबे समय तक इलाज चलने और दवा की खुराक पूरी करने पर रोगी सामान्य जीवन जी सकता है. दवाई की खुराक पूरी नहीं करने पर यह रोग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए नुकसानदायक है. सभी सरकारी अस्पताल पर डीईसी दवा नि:शुल्क उपलब्ध है जिसे 5 सालों तक साल में एक बार लेना आवश्यक है.

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