Mahua Live Nalanda: सज गया मां का दरबार, दो दिवसीय शीतलाष्टमी मेला आज से शुरू

मघड़ा में खेल-तमाशे और मनोरंजन के लिए लगाये गये झूले

बिहार शरीफ (नालंदा) । जिला मुख्यालय बिहारशरीफ से तीन किलोमीटर दूर बिहारशरीफ-एकंगरसराय रोड किनारे स्थित है मघड़ा गांव। यहां स्थापित है विश्व प्रसिद्ध सिद्धपीठ माता शीतला मंदिर। चैत्र कृष्ण पक्ष सप्तमी गुरुवार से दो दिवसीय मेले की शुरुआत होगी। अष्टमी व नवमी को पूजा अर्चना के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ेगा। दूर-दूर से श्रद्धालु माता के दरबार में पहुंचेंगे। खास यह भी कि पिछले दो साल से कोरोना के कारण मेला लगाने पर पाबंदिया थीं। इसबार सारी पाबंदियां खत्म हुई हैं तो मेले की रौनक भी लौट आयी है। 


पंडा कमेटी द्वारा माता शीतला मंदिर को खास तरीके से सजाया-संवारा गया है। मंदिर के बगल के तालाब की सफाई हो चुकी है। मघड़ा के विस्तारित नगर निगम क्षेत्र में शामिल हो जाने से निगम के कर्मी सफाई और बेहतर इंतजाम में जुट गये हैं। पूजा-अर्चना से पहले तालाब में स्नान करने की परंपरा है। मंदिर के आसपास पूजन सामग्री, श्रृंगार, खिलौने, चाट-पकौड़े, गुपचुप, मिठाइयां आदि की दुकानें सजने लगी हैं। बच्चों के मनोरंजन के लिए हवाई झूले, चकरी, ड्रगन झूले, मिक्की मौस आदि ढेरों इंताजम किये गये हैं। मंदिर के पुजारी प्रभात कुमार पांडेय बताते हैं कि इस बार बहुत सालों बाद विशेष संयोग बन रहा है। हर साल चैत्र कृष्ण पक्ष अष्टमी के दिन विशेष पूजा की जाती है। इसके अलावा हर मंगलवार को भी यहां भक्तों की भीड़ जुटती है। इसबार नवमी तिथि को शनिवार है। यह बहुत ही अच्छा संयोग है। माता की कृपा भक्तों पर खूब बरसेंगी। दोनों दिन माता का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। एक लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है।  मंदिर परिसर में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ पर नजर रखने के लिए जगह-जगह पर सीसीटीवी कैमरे लगाये हैं। पुजारी सुधीरचन्द्र मिश्रा, निलमणि पाठक, माधेश्वर पाठक,  विश्वास कुमार, जयंत शर्मा बताते हैं कि अतिप्राचीन काल से चैत्र कृष्ण पक्ष सप्तमी के दिन मघड़ा तथा इसके आसपास के दर्जनों गांवों में बसिऔड़ा मनाने की परंपरा चली आ रही है। इस बार भी इन गांवों के लोग गुरुवार की शाम में खाना बनाने के बाद अपने-अपने घरों की साफ-सफाई करेंगे। शुक्रवार को यानी अष्टमी के दिन किसी घर में चूल्हे नहीं जलेंगे। रात में बनाये गये खाने को लोग बसिऔड़ा के रूप में ग्रहण करेंगे। उन्होंने बताया कि साल में चार बार बसिऔड़ा मनाया जाता है। पहला चैत्र कृष्ण पक्ष सप्तमी में, दूसरा वैशाख कृष्ण पक्ष सप्तमी में, तीसरा जेठ कृष्ण पक्ष सप्तमी और चौथा असाढ़ कृष्ण पक्ष सप्तमी को। 
चैत्र अष्टमी के दिन मां की प्रतिमा स्थापित हुई थी।पुजारी प्रभात कुमार पांडेय बताते हैं कि मान्यता है कि गांव के एक ब्राह्मण को माता ने रात में स्वप्न दी कि उनकी मूर्ति नदी के किनारे जमीन के अंदर है। उसे गांव के किसी स्थान पर स्थापित कर पूजा-अर्चना करें। इसके बाद ब्राह्मण ने नदी के किनारे स्थित एक कुएं की खुदाई कर मां शीतला की प्रतिमा को निकाला तथा उसे गांव के तालाब के बगल में स्थापित कर दिया। जिस कुएं से मां की प्रतिमा निकली थी, उसे मिट्ठी कुआं के नाम से जाना जाता है। मघड़ा के ग्रामीण बताते हैं कि मिट्ठी कुआं का पानी कभी नहीं सुखता है तथा पानी काफी मिट्ठा है। पुजारी जी बताते हैं कि जिस दिन मां की प्रतिमा कुएं से निकाली गयी थी उस दिन चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमी थी तथा अष्टमी के दिन मां की प्रतिमा की स्थापना हुई थी। उसी समय से मघड़ा में मेले की शुरुआत हुई, जो अबतक जारी है।

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